Kya Hai SC-ST ekt, Kis Badalaav Ko Lekar Macha Hai Itana Bavaa

Kya Hai SC-ST ekt, Kis Badalaav Ko Lekar Macha Hai Itana Bavaa puri jankari in hindi

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में काफी विरोध हो रहा है. दलित समुदाय के लोग और कई संगठन इस पर अपनी आपत्ति जता रहे हैं. देशभर में इन लोगों की तरफ से ‘भारत बंद’ भी किया जा रहा है. आखिर क्या है एससी-एसटी एक्ट?, क्यों बनाया गया था इसे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्यों हो रहा है विरोध? सभी बातें समझिए यहां
Kya Hai SC-ST ekt, Kis Badalaav Ko Lekar Macha Hai Itana Bavaa
Kya Hai SC-ST ekt, Kis Badalaav Ko Lekar Macha Hai Itana Bavaa

SC/ST एक्ट (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ आज आरक्षित वर्ग के समस्त संगठनों द्वारा भारत बंद का ऐलान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों की नाराजगी लगातार जारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) ऐक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि इस मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच की बात कही थी। जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित खंडपीठ ने कहा था कि मामला दर्ज होने के बाद सात दिनों के अंदर-अंदर जांच पूरी हो जानी चाहिए। 

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम,(The Scheduled Castes and Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989) को 11 सितम्बर 1989 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया था, जिसे 30 जनवरी 1990 से सारे भारत ( जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में लागू किया गया। यह अधिनियम उस प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता हैं जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य नही हैं तथा वह व्यक्ति इस वर्ग के सदस्यों का उत्पीड़न करता हैं। इस अधिनियम मे 5 अध्याय एवं 23 धाराएं हैं


क्या है एसटी/एससी एक्ट विवाद
भारत में दलित उत्पीडन का मुद्दा हमेशा से ही काफी नाजुक रहा है. ऊंची जातियों द्वारा दलितो को किसी प्रकार के शोषण से बचाने के लिए देश में 1995 में एसटी/एससी एक्ट लागू हुआ.
मगर हालिया रिपोर्ट के अनुसार हर साल देश भर में लाखों दलित उत्पीड़न से जुड़े केस सामने आते हैं जिनमें से सैकड़ों फर्जी होते हैं.
इसी फर्जीपने को रोकने के लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला किया है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह पहले शुरुआती जांच होगी.
केस दर्ज करने से पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी पूरे मामले की प्रारंभिक जांच करेगा और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि कुछ मामलों में आरोपी को अग्रिम ज़मानत भी मिल सकती है
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