mughal period part-4

जहांगीर 1605 से 1627
 mughal period part-4
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जहांगीर ने शासन संभालते समय 12घोषणा की थी घोषणाओं को आईने ए जहांगीरी के नाम से जाना जाता है न्याय की जंजीर का संबंध जहांगीर से है 1602 में जहांगीर के कहने पर वीर बुंदेला ने अबुल फजल की हत्या करवा दी थी
खुसरो का विद्रोह 1606
खुसरो का विद्रोह काल के समय अर्जुन देव जी ने सहयोग दिया था परिणाम स्वरुप जहांगीर ने 1606 में ही गुरु अर्जुन देव को मृत्युदंड दे दिया
मुगल मेवाड़ संधि 1605
संधि में मेवाड़ के राणा अमर सिंह ने जहांगीर की अधीनता स्वीकार की जहांगीर ने 1617 में दक्षिण विजय के उपलक्ष में शहजादा खुर्रम को शाहजहां की उपाधि प्रदान की थी जहांगीर ने 1620 में कांगड़ा को जीता कांगड़ा विजय जहांगीर की धार्मिक कट्टरता का एकमात्र उदाहरण है जहांगीर के समय 1608 में ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रतिनिधि होम किसन भारत आया था जहांगीर से मिला था 1608 से 1611 तक भारत में रहा इंग्लिश खान की उपाधि और 400 का मनसब प्रदान किया था जहांगीर के समय 1615 में इंग्लैंड के सम्राट जेम्स प्रथम का दूत टॉमस रो भारत आया था और अजमेर में जहांगीर से मिला 1518 तक भारत में रहा जहांगीर के काल में 1605 में सर्वप्रथम भारत में तंबाकू की खेती प्रारंभ हुई थी भारत में तंबाकू पुर्तगाली लेकर आए थे जहांगीर ने सर्वप्रथम तंबाकू पर प्रतिबंध लगाया था
नूरजहां गुट 1611-22
नूरजहां का वास्तविक नाम मेहरूनिशा था जहांगीर से पहले नूरजहां अलीमुद्दीन शेर अफगान की पत्नी थी जहांगीर ने नूरजहां से विवाह 1611 में किया था जहांगीर ने उसे नूर महल की उपाधि प्रदान की थी इस ग्रुप नूरजहां का पिता मिर्जा ग्यास बेग और उसकी माता अस्मत बेगम इसका दामाद आसिफ खान और शहजादा खुर्रम थे
शहजादा खुर्रम के विद्रोह का दमन महावत खान ने किया था
महावत कहां का विद्रोह 1626 जहांगीर की मृत्यु 1627 में लाहौर में हुई लाहौर के निकट शहादरा नामक स्थान पर जहांगीर को दफनाया गया नूरजहां की मृत्यु 1645 में लाहौर में हुई थी

शाहजहां 1628 से 1658 तक
इसके बचपन का नाम खुर्रम यह जोधाबाईऔर जहांगीर का पुत्र था जहांगीर ने विजय के उपलक्ष्य में इसे शाहजहां की उपाधि प्रदान की थी 1612 में शाहजहां का विवाह आसिफ खान की पुत्री मुमताज से हुआ मुमताज का वास्तविक नाम अर्जुमंद बानो बेगम था सिजदा प्रथा को बंद करके चहार तस्लीम की प्रथा को प्रारंभ किया शाहजहां ने 1633 में अहमदनगर को मुगल साम्राज्य में शामिल कर लिया था 1648 में कंधार का प्रदेश अंतिम रूप से मुगलों के हाथ से निकल गया था
उत्तराधिकारी संघर्ष
शाहजहां के जीवन काल में 1657- 58 में के पुत्रों में राजगद्दी प्राप्त करने के लिए उत्तराधिकारी संघर्ष हुआ
उत्तराधिकारी के नियमों को अभाव
शहजादों के विरोधी चरित्र
शहजादों के स्वतंत्र साधन दारा पंजाब का गवर्नर था सुजा बंगाल का गवर्नर था औरंगजेब दक्षिण भारत का गवर्नर था
बहादुरपुर का युद्ध 14 फरवरी 1458
दारा शिकोह और सुजा के मध्य इस युद्ध में शाही सेना का नेतृत्व मिर्जा जयसिंह और दाराशिकोह के पुत्र ने किया था इस युद्ध में सूजा की पराजय हुई
धरमत का युद्ध
15 अप्रैल 1658 दारा शिकोह और औरंगजेब के मध्य युद्ध में शाही सेना का नेतृत्व जसवंत सिंह और कासिम खान ने किया था इस युद्ध में दारा शिकोह की हार हुई
सामूगढ़ का युद्ध
29 जून 1659 दारा शिकोह और औरंगजेब इस युद्ध में नेतृत्व दारा शिकोह ने किया लेकिन दारा शिकोह को पराजित होकर भागना पड़ा
खजुआ युद्ध
औरंगजेब और सूजा के मध्य युद्ध में सूजा मारा गया
दौराई का युद्ध
मई 1659 औरंगजेब ने दारा शिकोह को हराकर मार दिया


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