mughal period part-3

 अकबर 1556 से 1605 तक
mughal period part-3
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अकबर का बचपन का नाम बदरुद्दीन था जन्म 15 अक्टूबर 1542 अमरकोट में राणा वीर साल के भवन में हुआ था अकबर का राज्यभिषेक 14 फरवरी 1556 को कालानौर नामक स्थान पर गुरदासपुर जिले में मिर्जा अब्दुल कासिम ने किया था अकबर का रक्षक व प्रधानमंत्री बैरम खान था इनकी माता का नाम हमीदा बानू बेगम था
पानीपत का द्वितीय युद्ध 5 नवंबर 1556
5 नवंबर 1556 को अकबर ने हेमू को पराजित किया और मार डाला हेमू आदिल शाह सूरी का प्रधानमंत्री और सेनापति था इस युद्ध में अकबर की सेना का नेतृत्व बैरम खान ने किया था बैरम खान का अंगरक्षक काल 1556 से 1560 तक था अकबर का शिक्षक अब्दुल लतीफ था
तिलवाड़ा युद्ध 1507
बैरम खान व अकबर के सेनापति मीर मोहम्मद के मध्य युद्ध और बैरम खां इस युद्ध में पराजित हुआ
पर्दा शासन 1560 से 62
इसकी मुखिया अकबर की दाहिमा महामंगा थी पति शमसुद्दीन कन्नौज युद्ध में हिमायू की जान बचाई थी आदिल शाह सूरी के प्रधान-मंत्री हेमू इन्होंने हिमायू की मृत्यु के बाद दिल्ली पर अधिकार कर लिया और विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी
मालवा विजय 1561
बाज बहादुर को हराया यह अकबर के साम्राज्य विस्तार के समय पहली विजय थी इस अभियान में अकबर की सेना का नेतृत्व आदम खान ने किया था
मेड़ता विजय 1562 इस समय मेड़ता का शासक जयमल राठौड़ था
गोडवाना विजय 1564 इसका शासक वीर नारायण संरक्षिका दुर्गावती थी
मेवाड़ विजय 1568 उदय सिंह को हराकर मेवाड़ को जीता
गुजरात विजय 1572 शासक मुजफ्फर खान तृतीय को हराया
बंगाल और बिहार विजय 1574 शासक दाउद खान को हराया
कबूल विजय 1581 मिर्जा हाकिम को हराया
कश्मीर विजय 1586 युसूफ खान को हराया
उड़ीसा विजया 1591 निसार खान को हराया
सिंध विजय 1591 जानी वेग को हराया
कंधार विजय 1595 मुजफ्फर हुसैन को हराया
अहमदनगर की विजय 1600 निजाम मोहम्मद और चांद बीबी को हराया
असीरगढ़ 1601 मीर बहादुर को हराकर असीरगढ़ को जीता यह अकबर की अंतिम विजय थी
1576 में अकबर ने हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप को हराया
1562 आमेर नरेश भारमल ने स्वेच्छा से अकबर की अधीनता स्वीकार की और अपनी पुत्री हरखा बाई का अकबर से विवाह किया अकबर की अधीनता स्वीकार करने वाला और मुगलों से वैवाहिक संबंध स्थापित करने वाला पहला हिंदू या राजपूत शासक भारमल ही था
1570 में अकबर ने नागौर दरबार का आयोजन किया इस दरबार में बीकानेर के कल्याणमल और जैसलमेर के हर राय सहित राजस्थान के अनेक राजाओं ने अकबर की अधीनता स्वीकार की 1591 में खानदेश के शासक अली खान ने स्वेच्छा से अकबर की अधीनता स्वीकार की दक्षिणी भारत का प्रथम शासक था जिसने स्वेच्छा से अकबर की अधीनता स्वीकार की
अकबर से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाएं
1562 में युद्ध बंदियों को दास बनाने पर रोक
1563 में तीर्थ यात्रा कर हटाया
1564 में जजिया कर हटाया
1570 में फतेहपुर सीकरी की स्थापना की
1575 में मनसबदारी व्यवस्था को लागू किया
1578 में इबादतखाना सभी धर्मों के लिए खोल दिया गया
1579 में मजहर की घोषणा की गई
1580 में आइन ए दहसाला बंदोबस्त की घोषणा की गई
1582 में लागी नामक धर्म की स्थापना की गई
इबादत खाने में भाग लेने वाले विभिन्न धर्मों के धर्माचार्य
पारसी- दस्तूर मेहर जी राणा
जैन धर्म- हीर विजय सूरी और जिन चंद्र सूरी
अकबर ने हीर विजय सूरी को जगद्गुरु और जिन चंद्र सूरी को युग प्रधान की उपाधि प्रदान की थी
ईसाई धर्म- गदर इक्विनॉक्स
मजहर की घोषणा
अकबर ने 1579 में प्रमुख उलेमाओं से हस्ताक्षरित के घोषणा पत्र जारी किया जिसके अनुसार अकबर को प्रशासनिक कानूनों के साथ-साथ धार्मिक कानूनों की व्याख्या करने का अधिकार मिल गया इस घोषणा पत्र को मजहर की घोषणा के नाम से जाना जाता है इस का प्रारूप शेख मुबारक नागौरी ने तैयार किया था
दीन-ए-इलाही
अकबर द्वारा प्रचलित एक धर्म जिसमें सभी धर्मों का सार था अर्थात यह सर्वधर्म समभाव पर आधारित था इस धर्म को कुल 18 सदस्यों ने स्वीकार किया था हिंदुओं में एकमात्र बीरबल ने इसे स्वीकार किया था इस धर्म का प्रमुख पुरोहित अब्दुल फजल था
अकबर के नवरत्न
हकीम हुमाम - राज वेद
मुल्ला दो प्याजा - रसोईया
अबुल फजल - इतिहासकार
फेजी - कवि
रहीम - कवि
तानसेन - संगीतकार
बीरबल - सलाहकार
मानसिंह - सेनापति
टोडरमल - वित्त विशेषज्ञ
अकबर की मृत्यु 26 अक्टूबर 1605 को आगरा में हुई और इन्हें सिकंदरा नामक स्थान पर अकबर को दफनाया गया था

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